चाणक्य नीति के अनमोल वचन – Chanakya Niti in Hindi

Born350 BCE
Died275 BCE, Pataliputra
Other namesKauṭilya, Vishnugupta
Alma materTaxila
OccupationProfessor; advisor of Chandragupta Maurya
Known forFoundation of the Maurya Empire
Notable work- Arthashastra, Chanakya Niti
चाणक्य नीति

1. As long as your body is healthy and under control and death is distant, try to save your soul; when death is immanent what can you do?

जब तक आपकी काय निर्गुण और वश में है और मौत दूर है, अपनी आत्मा को बचाने का प्रयत्न कीजिये; जब मौत सर पर आ जायेगी तब आप क्या कर पाएंगे?

चाणक्य नीति

2: God is not present in idols. Your feelings are your god. The soul is your temple.

ईश्वर पत्थर की मूर्तियों में नहीं है। आपकी अनुभूति आपका भगवान है। और आपकी आत्मा आपका मंदिर है

चाणक्य नीति

3: A man is great by deeds, not by birth.

कोई इंसान अपने कर्मों से महान होता है, पैदा होने से नहीं।

चाणक्य नीति

4: Treat your kid like a darling for the first five years. For the next five years, scold them. By the time they turn sixteen, treat them like a friend. Your grown up children are your best friends.

प्रथम पांच वर्षो में अपने बच्चे को बड़े प्यार से रखिये। अगले पांच वर्ष उन्हें डांट-डपट के रखिये। जब वह सोलह वर्ष का हो जाये तो उसके साथ एक दोस्त की तरह व्यवहार करिए। आपके वयस्क बच्चे ही आपके सबसे बढिया दोस्त हैं।

चाणक्य नीति

5: Even if a snake is not poisonous, it should pretend to be venomous.

यदि सर्प विषैला ना भी हो तो उसे स्वयं को विषैला दिखाना चाहिए।

चाणक्य नीति

6: He who lives in our mind is near though he may actually be far away; but he who is not in our heart is far though he may really be nearby.

वह जो हमारे चिंतन में रहता है वह नजदीक है, भले ही हकीकत में वह बहुत दूर ही क्यों ना हो; लेकिन जो हमारे दिल में नहीं है वो पास होते हुए भी बहुत दूर होता है

चाणक्य नीति

7:There is some self-interest behind every friendship. There is no friendship without self-interests. This is a bitter truth.

हर दोस्ती के पीछे कोई ना कोई स्वार्थ जरुर छुपा होता है। ऐसी कोई दोस्ती नहीं जिसमे स्वार्थ ना हो। यह कड़वा सत्य है।

चाणक्य नीति

8: Books are as useful to a stupid person as a mirror is useful to a blind person.

किसी बेवकूफ इंसान के लिए पुस्तके उतनी ही लाभदायक हैं जितना कि एक अंधे व्यक्ति के लिए दर्पण।

चाणक्य नीति

9: Once you start a working on something, don’t be afraid of failure and don’t abandon it. People who work sincerely are the happiest.

जब आप किसी काम को आरंभ करें, तो नाकामयाबी से मत घबराए और उस काम को ना छोड़ें जो लोग ईमानदारी से कार्य करते हैं वो सबसे खुश होते हैं

चाणक्य नीति

10: The serpent, the king, the tiger, the stinging wasp, the small child, the dog owned by other people, and the fool: these seven ought not to be awakened from sleep.

सांप, नृप, सिंह, डंक मारने वाले ततैया, छोटे बच्चे, दूसरों के कुत्तों, और एक बेवकूफ : इन सातों को निंद्रा से नहीं उठाना चाहिए

चाणक्य नीति

11: Before you start some work, always ask yourself three questions – Why am I doing it, What the results might be and Will I be successful. Only when you think deeply and find satisfactory answers to these questions, go ahead.

कोई कार्य आरम्भ करने से पूर्व , खुद से तीन सवाल कीजिये – मैं ये किसलिए कर रहा हूँ, इसके परिणाम क्या हो सकते हैं और क्या मैं कामयाब होऊंगा. और जब गहराई से सोचने पर इन सवालों के संतोषजनक जवाब प्राप्त जायें, तभी आगे बढिए.

चाणक्य नीति

12: As a single withered tree, if set aflame, causes a whole forest to burn, so does a rascal son destroy a whole family.

जिस तरह एक सूखे वृक्ष को अगर आग लगा दी जाये तो वह पूरा जंगल जला कर राख कर देता है, उसी प्रकार एक पापी पूत पुरे परिवार को नष्ट कर देता है.

चाणक्य नीति

13: A man is born alone and dies alone; and he experiences the good and bad consequences of his karma alone; and he goes alone to hell or the Supreme abode.

इंसान अकेले पैदा होता है और अकेले ही मृत्यु को प्राप्त होता है; और वो अपने अच्छे और बुरे कार्यो का फल खुद ही चुकाता है; और वह अकेले ही नर्क या स्वर्ग के घर जाता है.

चाणक्य नीति

14: Whores don’t live in company of poor men, citizens never support a weak company and birds don’t build nests on a tree that doesn’t bear fruits.

वेश्याएं गरीबों के साथ नहीं रहतीं, नागरिक निर्बल संगठन का साढ़ नहीं देते, और पक्षी उस वृक्ष पर घोंसला नहीं बनाते जिस पर फल ना लगे हों.

चाणक्य नीति

15: The fragrance of flowers spreads only in the direction of the wind. But the goodness of a person spreads in all direction.

फूलों की खुशबू केवल हवा की दिशा में फैलती है. लेकिन एक इंसान की अच्छाई हर दिशा में फैलती है.

चाणक्य नीति

16: We should not fret for what is past, nor should we be anxious about the future; men of discernment deal only with the present moment.

हमें बीते हुए कल के बारे में पछतावा नहीं करना चाहिए, ना ही भविष्य के बारे में सोचकर परेसान होना चाहिए; बुद्धिमान इंसान हमेशा वर्तमान में जीते हैं.

चाणक्य नीति

17:Education is the best friend. An educated person is respected everywhere. Education beats the beauty and the youth.

शिक्षा सबसे अच्छा दोस्त है. एक शिक्षित इंसान हर जगह इज्जत पाता है. शिक्षा खुबसुरती और जवानी को हरा देती है.

चाणक्य नीति

18: Never make friends with people who are above or below you in status. Such friendships will never give you any happiness.

कभी भी उनसे दोस्ती मत कीजिये जो आपसे कम या ज्यादा इज्जतदार हों. ऐसी दोस्ती कभी आपको ख़ुशी नहीं दे सकती

चाणक्य नीति

19: There is poison in the fang of the serpent, in the mouth of the fly and in the sting of a scorpion; but the wicked man is saturated with it.

सर्प के फन, मक्खी के मुहं और बिच्छु के डंक में विष होता है; पर दुष्ट इंसान तो इससे पूरा भरा होता है.

चाणक्य नीति

20: The biggest guru-mantra is: never share your secrets with anybody. It will destroy you.

सबसे बड़ा गुरु मन्त्र है : कभी भी अपने रहस्य दूसरों को मत बताएं. ये आपको नष्ट कर देगा.

चाणक्य नीति

21: He who is overly attached to his family members experiences fear and sorrow, for the root of all grief is attachment. Thus one should discard attachment to be happy.

वह जो अपने परिवार से अत्यधिक जुड़ा हुआ है, उसेदर और चिंता का सामना करना पड़ता है, क्योंकि सभी दुखों कि जड़ अपनापन है. इसलिए खुश रहने कि लिए लगाव छोड़ देना चाहिए.

चाणक्य नीति

22: Do not reveal what you have thought upon doing, but by wise council keep it secret being determined to carry it into execution.

इस बात को सामने मत आने दीजिये कि आपने क्या करने के लिए सोचा है, बुद्धिमानी से इसे राज बनाये रखिये और इस कार्य को करने के लिए खुद से दृढ संकल्प रहिये.

चाणक्य नीति

23: It is better to die than to preserve this life by incurring disgrace. The loss of life causes but a moment’s grief, but disgrace brings grief every day of one’s life.

अपमानित हो के जिंदगी जीने से अच्छा मरना है. मौत तो बस एक पल का दुःख देती है, लेकिन अपमान हर दिन जिंदगी में दुःख लाता है.

चाणक्य नीति

24: The world’s biggest power is the youth and beauty of a woman.

संसार की सबसे बड़ी ताकत नौजवानी और औरत की खुबसुरती है.

चाणक्य नीति

25: The wise man should restrain his senses like the crane and accomplish his purpose with due knowledge of his place, time and ability.

सारस की तरह एक विवेकशील इंसान को अपनी इन्द्रियों पर नियंत्रण रखना चाहिए और अपने उद्देश्य को स्थान की जानकारी, समय और योग्यता के अनुसार प्राप्त करना चाहिए.

चाणक्य नीति

26: Test a servant while in the discharge of his duty, a relative in difficulty, a friend in adversity, and a wife in misfortune.

सेवक को तब परखें जब वह कार्य ना कर रहा हो, रिश्तेदार को किसी बुरे समय में, दोस्त को संकट में, और पत्नी को घोर विपत्ति में.

चाणक्य नीति

27: If one has a good disposition, what other virtue is needed? If a man has fame, what is the value of other ornamentation?

अगर किसी का स्वभाव बढिया है तो उसे किसी और गुण की क्या आवश्यकता है ? यदि इंसान के पास प्रसिद्धि है तो भला उसे और किसी श्रृंगार की क्या जरूरत है.

चाणक्य नीति

28: The life of an uneducated man is as useless as the tail of a dog which neither covers its rear end, nor protects it from the bites of insects.

एक बिना पढ़े लिखे इंसान का जीवन उसी तरह से बेकार है जैसे की कुत्ते की पूँछ, जो ना उसके पीछे का भाग को ढकती है ना ही उसे कीड़े-मकौडों के डंक से बचाती है.

चाणक्य नीति

29: The one excellent thing that can be learned from a lion is that whatever a man intends doing should be done by him with a whole-hearted and strenuous effort.

एक बहुत बड़ी बात जो शेर से सीखी जा सकती है वो ये है कि इंसान जो कुछ भी करना चाहता है उसे पूरे सच्चे दिल और ज़ोरदार प्रयत्न के साथ करे.

चाणक्य नीति

30: As soon as the fear approaches near, attack and destroy it.

जैसे ही दर आपके पास आये, उस पर हमला कर उसे खत्म कर दीजिये.

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