कितना जानते हो आप दीपावली के बारे में

हम सब हर साल दीपावली को बड़े धूमधाम से इकट्ठे होकर मनाते हैं ।लेकिन आज के इस modern युग में हम में बहुत सारे ऐसे भी लोग होंगे जिन्हें दीपावली का मतलब भी नहीं पता होगा । उन्हें ये भी नहीं पता होगा की इस त्योंहार को मनाने के पीछे वजह क्या है ? अगर हमें अपने पर्वों को हमेशा के लियें जीवंत रखना है तो हम सब को दीपावली के बारें में जानना बहुत जरूरी है।

दीपावली का मतलब

दीपावली या इसे हम दिवाली भी कहकर बुलातें हैं  अर्थात रौशनी का त्यौहार । दीपावली = दीप + आवली यानी की दीपों के पंक्ति हर साल शरद ऋतू में मनाया जाने वाला प्राचीन त्योंहार है ।  दीपावली भारत के सबसे बड़ों प्रतिभाशाली त्योंहारो में से एक हैं । दीपावली का त्योंहार अंधकार पर प्रकाश की जीत को दर्शाता है। इसीलिए दीपावली के दिन सभी लोग अपने अपने घरों में , मंदिरों में दीयों को जलाकर अँधेरे को दूर करते हैं ।

दीपावली शब्द की उत्पति

दीपावली शब्द की उत्पति मुख्य रूप से देवों की भाषा संस्कृत के दो शब्दों – दीप अर्थात दिया और आवली यानी की पंक्ति या लाइन के मिश्रण से हुई हैं ।

हम दीपावली क्यूँ मनाते हैं ?

ऐसा कहा जाता है की दीपावली के दिन ही अयोध्या के राजा श्री रामचन्द्र जी अपने 14 साल के वनवास को काटकर वापिस लोटे थे ।अयोध्या की प्रजा के हृदय में श्री रामचन्द्र जी के लियें अपार स्नेह और प्यार था । इसलिए उन्होंने खुश होकर अपने प्रिय राजा के स्वागत के लिए घी के दीयें जलाए थे । वो कार्तिक मास की काली अमावस्या की रात थी जो दीयों के प्रकाश से जगमगा उठी थी । इसलिए तभी से लेकर आज तक भारत में इसे दीपावली के रूप में मनाते हैं । यह सभी लोगों का विश्वास है की सत्य की हमेशा जीत होती है और झूठ का नाश होता है ।  और ये प्रकाशों का पर्व दीपावली भी यहीं चरितार्थ करता हैं ।

हमारे लियें दीपावली का महत्व

हम सब की life में दीपावली का बहुत ज्यादा महत्व है । दीपावली के समय सभी लोग अपने घरों को साफ़ करके उन्हें अच्छे से सजातें है । इस दौरान लोग गहनें ,बर्तन व अपने परिवार के लियें कपड़े और उपहार खरीदतें है । लोग अपने परिवार के सदस्यों को और अपने दोस्तों को उपहार के रूप में मिठाइयाँ और सूखे मेवें देते हैं ।

दीपावली का ऐतिहासिक महत्व

अगर हम इतिहास के पन्नो को पलटकर देखे तो इतिहास में दीपावली के दिन बहुत कुछ हुआ है । उनमे से कुछ मुख्य और प्रचलित तथ्यों को निचे दे रहा हूँ – पंजाब राज्य में पैदा हुए स्वामी रामतीर्थ जी का जन्म और महाप्रयाण दोनों ही दीपावली के दिन ही हुआ था । रामतीर्थ जी ने दीपावली के दिन ही गंगा के तट पर नहाते समय ‘ औमं ’शब्द कहते हुए समाधि ले ली थी । महर्षि दयानंद सरस्वती जी जिन्होंने आर्य समाज की स्थापना की थी , दीपावली के दिन ही भारतीय संस्कृति के महान जननायक के रूप में राजस्थान के अजमेर के समीप अवसान लिया था ।

आर्थिक महत्व

आर्थिक महत्व के मायने से भी दीपावली का बहुत महत्व है । क्यूंकि इंडिया में दीपावली का त्योंहार प्रमुख खरीददारी की अवधि का प्रतीक माना जाता है । हमारे देश के आर्थिक विकास में भी दीपावली के त्योंहार का काफी महत्व है , क्यूंकि दीपावली भारत में सोने और गहनों की खरीददारी का सबसे बड़ा सीजन होता है । यह त्योंहार नये कपड़ो ,उपहार , घर के सामान और इसके अलावा अन्य बड़ी खरीददारी का समय होता है । दीपावली के दिन पैसो से लक्ष्मी जी की पूजा की जाती है क्यूंकि लक्ष्मी जी धन ,समृद्धि और निवेश की देवी मानी जाती है । इसलियें त्योंहार में खर्च और खरीद को शुभ माना जाता है । दीपावली के time मिठाई और आतिशबाजी( पटाखे आदि ) की खरीद बहुत ज्यादा होती है । यंहा तक की हर साल दीपावली के दौरान कम से कम पांच हजार करोड़ रूपए के पटाखों की सेल होती है ।

संसार के अन्य देशो में दीपावली

ऐसा नहीं है की केवल भारत के अंदर ही दीपावली को मनाया जाता है । बल्कि भारत के अलावा ऐसे बहुत सारे देश है जंहा पर भी दीपावली को बड़ी धूम धाम से मनाया जाता है । जैसे की श्रीलंका , पाकिस्तान , मलेशिया , थाईलेंड , सिंगापुर, कनाडा, ब्रिटेन, नेपाल और सयुंक्त राज्य अमेरिका आदि । इसके अलावा और भी बहुत सारे देश है जंहा पर दीपावली को मनाया जाता है । नेपाल के लोगों के लिए यह त्योंहार इसलिए महान है क्यूंकि इसी दिन नेपाल सवंत में नया वर्ष शुरू होता है ।

दीपावली से होने वाले नुक्सान

दीपावली एक ऐसा त्योंहार है जो हम सभी के लिए खुशियाँ लेकर आता है । लेकिन दूसरी ओर जंहा दीपावली के दिन जो आतिशबाजी और पटाखे चलाये जाते हैं उसे हमारे पर्यावरण पर बहुत असर पड़ता है ।  पटाखों के कारण जो शोर होता उसके कारण ध्वनी प्रदुषण को बढ़ावा मिलता है ।

इसके दूसरी सबसे बड़ी समस्या है वो वायु प्रदुषण की जिसके लिए पटाखों से पैदा होने वाला धुंआ सबसे बड़ा कारण है । वैज्ञानिको के अनुसार आतिशबाजी के दौरान इतना ज्यादा वायु प्रदूषण नहीं होता जितना की आतिशबाजी के बाद होता है। । जो की हर साल की पूर्व दीपावली के लेवल से तकरीबन चार गुना बदतर और रोजाना के सामान्य दिनों के औसत स्तर से दो गुना ज्यादा पाया जाता है । यंहा तक की ज्यादा आतिशबाजी से हम सब की सुरक्षा कवच ओजोन परत को भी नुक्सान होता है । इसके अलावा भारत में दीपावली की दिन आतिशबाजी के दौरान जलने की घटनाएँ भी देखने को मिलती है जिसके कारण काफी मात्र में जालमाल का नुक्सान होता है ।

हमारी परम्परा

अँधेरे पर उजाले की जीत का यह त्योंहार हमारे समाज में खुशियाँ , भाई चारे और प्यार का संदेश फैलता है । हर किसी के दिल में दीपावली को लेकर बहुत उमंग होती है ।  इस दिन सभी लोग अपने घर का कोना कोना साफ करते है ।  सभी नये नये कपड़े पहनते है ।  सभी अपने अपने घरों में दियें जलाते है । —

मैं आपसे अनुरोध करता हूँ की आप दीपावली के दिन कम से कम आतिशबाजी का प्रयोग करें । इस दिन आप भी अच्छी बातों रूपी प्रकाश के दीये अपने अंदर जलाकर बुराई रूपी अन्धकार को मिटा दो । अंत में आपसे इतना ही कहना चाहूँगा की–

है रौशनी का त्योंहार लायें हर चेहरे पर मुस्कान ,सुख और समृधि की बहार,
समेट लो सारी खुशियाँ ,अपनों का साथ और प्यार !

शुभ दीपावली !

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